ट्रामा सेंटर की सुविधाओं की खुल रही है पोल, अच्छी व्यवस्थाओं के सभी दावे हुए फेल
लखनऊ
राजधानी लखनऊ के केजीएमयू के सबसे बड़े कहे जाने वाले ट्रामा सेंटर की सुविधाओं की खुल रही है पोल, अच्छी व्यवस्थाओं के सभी दावे हुए फेल
एक साथ 14 से 15 प्राइवेट और सरकारी एम्बुलेंस मरीजों को लेकर आईं हैं ट्रामा सेन्टर मगर नही है अस्पताल में स्ट्रेचर ट्रामा सेन्टर में मरीज के साथ तामीरदार स्ट्रेचर खोजने के लिए ट्रामा सेंटर के अंदर बाहर देखते रहते हैं कोई मरीज यदि छट्टी होकर जा रहा है तो वहीं सहारा है स्ट्रेचर पाने का इसमें वहां के कर्मचारी भी कोई सहायता नहीं करते गार्डो के किस्से तो सुने ही हैं।
जब मरीज़ अस्पताल लाया जाता हैं तो सबसे पहले स्ट्रेचर की जरुरत पड़ती हैं पर हमारे ट्रामा सेन्टर में कोई सही व्यावस्था नहीं
मगर इतने बड़े अस्पताल में स्ट्रेचर और अस्पताल कर्मी की नही है कोई सही व्यावस्था
मरीज़ के तीमारदार मरीज़ को अभी भी एम्बुलेंस में लेकर कर रहे हैं स्ट्रेचर और अस्पताल कर्मी का इंतज़ार
एम्बुलेंस में आये मरीजों को सही समय पर इलाज न मिलने से जा सकती है गंभीर मरीजों की जान
अस्पताल प्रशासन को नही है अव्यवस्था से कोई सरोकार, तभी तो नही हैं अस्पताल में स्ट्रेचर जैसी ज़रूरी चीज़ की सही मात्रा में व्यवस्था ना ही इसके लिए कभी गंभीरता से विचार किया गया
अस्पताल में एम्बुलेंस ने लगा रखा है जाम जिसके धुएं से फैल रहा है अस्पताल परिसर में प्रदूषण
कब सुधरेंगीं ट्रामा सेंटर की बिगड़ी हुई बदहाल और लचर व्यवस्थाएं से मरीजों की जा हैं जान अस्पताल प्रशासन लोगो की जंदगी से खेल रहा हैं शासन प्रशासन के लोगो को भी जानकारी हैं पर कार्यवाही नहीं होती इससे पहले सुरक्षा गार्डो के आंतक कि खबरे आती ही रहती है।