गणतंत्र के सच्चे सिपाही लड़ते है अशिक्षा से- प्रणय
सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हैं बालिकाओं को
वाराणसी / रोहनिया
समाज में शिक्षक प्रणय कुमार सिंह ने बालिका शिक्षा तथा ग्रामीण बालकों को शिक्षित करने का जो अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है उसे क्षेत्र में काफी सराहा जाता है।
प्रणय ने जिस तरह से हर एक बालक बालिकाओं की स्कूल ले जाने तथा उन्हें पढ़ाने को प्रयत्नशील रहते हैं उससे समाज में उनका कद और भी बढ़ा है।
समाज सेवक रहे प्रणय कुमार सिंह का सामाजिक मुद्दों को लेकर कार्य करने के कारण पहले से भी अपना रुतबा है। गंगापुर इंटर कॉलेज में शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए इन्होंने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन और भी मजबूती से किया है। लिहाजा ग्रामीण क्षेत्र में इन्हें छात्रों और अभिभावकों से बेहद सम्मान मिलता है। बालिका शिक्षा के लिए विशेष संकल्प लेने वाले श्री सिंह क्षेत्र के अभिभावकों से मिलकर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
यदि किसी कारणवश लड़कियां स्कूल नहीं आती या आना बंद कर देती तो वह उनके घरों तक जाते हैं और माता-पिता से बातचीत कर लड़कियों को पुनः विद्यालय आने को प्रेरित करते हैं।ऐसी बहुत सी बालिकाएं मिल जाएंगे जिनकी शुल्क की भरपाई ये अपने जेब से करते हैं।
इतना ही नहीं बालिकाओं को क्षेत्र भ्रमण,विद्यालय के आसपास ऐतिहासिक स्थलों को दिखाना उन्हें सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। इसके लिए ये समाज के लोगों से भी सहयोग लेकर छात्रों की मदद में लगा देते हैं। अब तक श्री सिंह आधा दर्जन से अधिक बार अपने संसाधन से बच्चों को शैक्षणिक भ्रमण पर ले जा चुके हैं।
विद्यालय में छात्रों को वाद-विवाद के लिए प्रेरित करना, उनके साथ अतिरिक्त समय देना, बीमारी की हालत में बच्चों के घर जाना उन्हें दवा तथा आर्थिक मदद दिलवाना जैसे गैर विद्यालयीय कार्य भी इन्होंने बखूबी किया है।
विद्यालय में बच्चों के के लिए हस्तलिखित पत्रिका ज्ञान गंगा भी इनके द्वारा संपादित की जाती है। जिसके कई अंक प्रकाशित हो चुके हैं। हस्तलिखित पत्रिका में बच्चों तथा शिक्षकों के लेख, कविताएं होती है।
विद्यालय परिसर में खाली पड़ी भूमि पर गंगा वाटिका स्थापित कर उसमें आयुर्वेदिक पौधे लगाकर उसे सुंदर रूप देने का श्रेय भी इन्हीं के नाम है।
प्रधानमंत्री के आह्वान पर स्वच्छता में विशेष रूचि देते हुए इन्होंने हर एक बालिका के घर पर शौचालय हो इसके लिए प्रयास किया। जिनके घर शौचालय नहीं थे उन बेटियों से पिता तथा भाई के नाम पत्र लिखवाया और उनकी मांगों को घर वालों से स्वैच्छिक आधार पर पूर्ण करवाया।
विद्यालय के साथ-साथ आस-पास के गांव में भी छात्रों के सहयोग से स्वच्छता अभियान चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के कारण इन्हें विगत वर्ष 2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री के साथ स्वच्छता दिवस मनाने के लिए वाराणसी जनपद की ओर से गुजरात के साबरमती भेजा गया था।
प्रणय सिंह बताते हैं कि यदि सामाजिक मुद्दों से छात्रों को जोड़ दिया जाए तो पर्यावरण प्रदूषण, बालिका अशिक्षा, मद्यपान, लिंग विभेद, बाल विवाह स्वत: समाप्त हो जाएंगे। इनका यह भी कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र की बच्चियां तथा बच्चों को यदि सकारात्मक कार्यों में लगाया जाए तो उसके परिणाम अच्छे होंगे। स्काउट प्रभारी होने के नाते यह बच्चों को पर्यावरण प्रेमी, मितव्ययी, आज्ञाकारी तथा अनुशासित भी बनाते हैं।
इन्होंने गांधी जी के विचारों के प्रचार प्रसार के लिए छात्र गांधी विचार अनुशीलन समिति भी गठित किए हुए हैं । इस समिति में शिक्षक तथा बच्चे और बच्चियां हैं। समिति के माध्यम से बच्चों में गांधी विचार की बातों का प्रचार प्रसार किया जाता है।
गांधीजी के बारे में तथ्यपूर्वक बातें जानकर छात्र और बच्चे समाज में भी गांधी विचारों का प्रचार-प्रसार करते हैं। श्री सिंह का मानना है कि यदि आने वाली पीढ़ियों को गांधी विचारों से अवगत करा दिया जाए तो समाज से हिंसा नफरत का खात्मा हो जाएगा। समाज में अहिंसक प्रेषक वातावरण तथा सद्भाव कायम वृद्धि में मदद मिलेगी।