*खुला पत्र प्रशासन एवं चिकित्सको के नाम*।
संजय गेड़ा जी के मृत्यु के पहले के वायरल हो रहे वीडियो एवं मेडिकल कॉलेज की ओर से दी जा रही सफाई ने सोचने पर मजबूर कर दिया है।
किसी की मृत्यु सरकार के लिए आंकड़ा हो सकती है पर मरने वालों के परिवार के लिए वो सारा जहाँ होता है।
*मरने के पहले दिया गया ब्यान डाइंग डिक्लेरेशन की तरह है इस लिए मेजिस्ट्रीयल जांच की मांग की जा रही है*।
चिकित्सको द्वारा कर्तव्य के निर्वाहन में शिथिलता नही बरती जाती पर संजय जी को परेशानी रही होगी तभी तो पीड़ा सामने आई है।
प्रशासन को अभी तक जांच शुरू कर देनी चाहिए थी क्योकि किसी की मृत्यु हुई है।
बुन्देलखंड क्षेत्र में बस चुके सभी चिकित्सको से भी मांग है कि उन्ही बुंदेलियो का अपने परिवार के सदस्य की भांति इलाज करना चाहिये ना कि प्रशानिक अमले के दिशा निर्देश पर क्योकि प्रशासनिक अधिकारी बुन्देलखंड में किरायेदार है जहां नई पोस्टिंग मिलेगी वहां चले जायेंगे। आज कोरोना है कल समाप्त हो जाएगा, आपको ओर हम बुंदेलियो को जीवन भर साथ रहना है।
चिकित्सको को धरती पर भगवान की संज्ञा दी गई है इसलिए लोगो ओर आपका बर्ताव एक दूसरे के प्रति बहुत मधुर होना चाहिये।
कार्य एवं बर्ताव ऐसा ना हो जाये जो किसी के लिए तकलीफ का कारण बने, यह बात समझने की है।
जो अधिकारी बुन्देलखंड के नही है उनसे अपनत्व की कल्पना नही की जा सकती है। जिस कार्य के लिए उनकी नियुक्ति बुन्देलखंड क्षेत्र में कई की गई है वे उसके प्रति कितने सजग होंगे कहा नही जा सकता। कुछ समाज सेवी होते उनका सम्मान किया जाना चाहिये।
एक बार पुनः आग्रह है कि मजिस्ट्रियल जांच करवा करवाने की कृपा करें।
सदर
भानू सहाय अध्यक्ष
बुन्देलखंड निर्माण मोर्चा