अवैध खनन पर प्रशासन की चुप्पी, खनन माफियाओं से जुगलबंदी या राजनैतिक दबाव (रिपोर्ट- रोहित गौतम)
मीडिया की सुर्खियों में मंझरी खनन फिर भी कार्यवाही शून्य
भदफ़र सीतापुर। जहां भ्रस्टाचार पर अंकुश लगाने और माफियाओ पर तुरत कार्यवाही में किसी तरह के हस्तक्षेप पर पावंदी लगाते हुए यू पी के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियो को कार्यवाही के लिए खुली छूट दे रखी है । लेकिन सीतापुर जिले की तहसील लहरपुर में जिम्मेदारों की खाउ कमाऊ नीति के चलते ग्राम पंचायत भदफ़र में करीब तीन सप्ताह से चल भारी पैमाने पर अवैध खनन पर रोक लगना दिवा स्वप्न प्रतीत होने लगा है। मीडिया की सुर्खियां बने मंझरी खनन पर अब तक जिम्मेदार रोक लगाने में नाकाम साबित हो रहे है।
बताते चले कि ग्राम पंचायत भदफ़र के मजरा मंझरी में डंप के ठेके पर प्रतिदिन करीब आधा दर्जन जे सी बी मशीनों द्वारा क्षेत्रीय किसानों को चंद रुपयो का लालच देकर कृषि योग्य भूमि की 3 फीट की जगह 10-10 फ़ीट गहराई तक खुदाई कर के डप पर ट्राली से पहुंचाई जा रही। बालू यही नही भारी मात्रा में खुदाई से ग्रामीण भी काफी परेशान है लेकिन खनन माफियाओं की ऊंची पहुंच और रसूख के आगे बेबस और भय भीत है। आलम यह है खनन माफियाओं के डर से कोई भी शिकायत करने का साहस नही जुटा पा रहा है। फिर भी कुछ ग्रामीणों द्वारा बीते दिनों आई जी आर एस पर शिकायत दर्ज करवाई लेकिन खनन स्पेक्टर व उपजिला अधिकारी लहरपुर खनन पर रोक लगाने में नाकाम साबित हुए। जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हो गए और खनन माफिया शिकायत कर्ताओं पर हमले तक पर उतारू है । फिर भी जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए है। अधिकारियो की खामोशी जहां शिकायत कर्ताओं की जान की दुश्मन बन बैठी है वही 3 टन की रुअल्टी पर 10 टन बालू की ढुलाई से बेशक भृष्टाचारियो की जेबें गर्म हो रही है लेकिन राजस्व को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है।