*नगर विधायक आरएमडी को बगावती दिखाने की पटकथा कही लखनऊ से तो नही लिखी जा रही..??तह खुलना बाकी है…!!*
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(रिपोर्ट - जयप्रकाश यादव) वर्तमान समय मे गोरखपुर की राजनीति में एक अलग प्रकार का भूचाल आया है।।अपने झंडे को ऊंचा व बुलन्द दिखाने की होड़ सी मच रखी है।।एक पाले में एक सांसद व चार विधायक व दूसरे पाले में 1 सांसद और 2 विधायक है।मामला शुरू होता है नगर विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल के एक शिकायत से नगर विधायक ने पीडब्लूडी के एक सहायक अभियन्ता की शिकायत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से कर दी।।जिसको डिप्टी सीएम ने संज्ञान में ले अधिकारी को हटा दिया।।वजीर ने अपना काम तो कर दिया अब चाल राजा को अपने पाले से चलना था।।
अब शुरू होता है खेल इसके तुरंत बाद सांसद रवि किशन एक पत्र केशव प्रसाद मौर्य को लिखते है कि सहायक अभियंता के हट जाने पर कार्य प्रभवित हो जाएगा और इसी नक्शे कदम पर चलते हुए सहायक अभियंता के पक्ष में चार विधायको ने चिट्ठी जारी कर दी कि सहायक अभियंता को ना हटाया जाए।।फिर क्या था नगर विधायक जी ने बयानों की झड़िया लगा दी।। उन्होंने कहा हमने जनता के मुद्दे को उठाया और जनता का प्रतिनिधि होने के नाते गलत को गलत कहूंगा।।चार में से एक विधायक ने पलटी मारी और अपने लेटर को फर्जी करार दे दिया।।
इसी बीच कैम्पियरगंज विधायक ने नगर विधायक के निधि ना मिलने पर बौखलाने की बात कह दी।फिर क्या विधायक जी ने उनके वन मंत्री से लेकर 400 करोड़ घोटाले तक का इतिहास याद दिला दिया।। अभी ये सब बीत ही रहा था कि सांसद रवि किशन ने जेपी नड्डा से मिले और तुरन्त नगर विधायक से इस्तीफा मांग लिया।।यहां तक उन्हें पार्टी विरोधी भी बता दिया।।इन सब के बीच पार्टी ने भी नगर विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।।
इन सब मामलों को देख लगता कि मामला एक छोटे से इंजीनियर के तबादले का नही बल्कि वर्चस्व का है।।आखिर किसके सह पर 20 साल के सिटिंग विधायक को पहली बार चुनकर आए सांसद ने यह कह दिया कि आप इस्तीफा दे दो।।साथ ही जिसका सरोकार ही शहर से नही है, जिसका क्षेत्र भी नही है वो कैसे विरोध में उतर गया।।इन सब मामलों से यही लगता कि नगर विधायक की कुर्सी के पाये को काटने के लिए लखनऊ भी रुचि ले रहा ।।इस महाभारत का द्रोण कौन है ये तह खुलने पर ही पता चलेगा।।