*पीलीभीत।परीक्षार्थियों और अभिभावकों के समर्थन में तथा परीक्षाओं में भाजपा के खिलाफ खुला पत्र*
(रिपोर्ट- रोहित गौतम) समाजवादी पार्टी के नि. जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव ने अगस्त क्रांति की समाजवादी दिशा बाइस में बाइसिकल डिजिट माध्यम से जन जन तक पहुचाने का काम करे जो लोग किन्ही कारणों से डिजिटल माध्यम/सोशल मीडिया माध्यम से नही जुड़े है उन तक संदेश पत्र पहुँचाने का काम करे ।और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मा. श्री अखिलेश यादव जी के द्वारा परीक्षार्थियों और अभिभावकों के समर्थन में तथा परीक्षाओं में भाजपा के खिलाफ खुला पत्र देकर जन जन तक पहुँचाने का निर्देश दिया।
नि. जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव ने कहा अगर दंभी भाजपा को लगता है कि परीक्षार्थियों और अभिभावकों की लोकप्रिय (?)मांग पर वह ऐसे जानलेवा एग्जाम करवा रही है, तो केंद्रों के बाहर वो अपने कैबिनेट मंत्री, सांसद और विधायक तैनात करें, जहां पर कोई भी नियम- कानून व sop नहीं होगा .साथ ही विद्यार्थियों के आने-जाने ,खाने पीने व ठहरने का प्रबंध वैसे ही करें जैसा वो विधायकों की खरीद-फरोख्त के समय करते हैं.
भाजपा की तरफ से हास्य पद और तर्कहीन बात फैलाई जा रही है कि जब लोग दूसरे कामों के लिए घर से निकल रहे हैं तो परीक्षा क्यों नहीं दे सकते हैं. भाजपाई सत्ता के मद में यह भी भूल गए कि लोग मजबूरी में निकल रहे हैं और जो लोग घर पर रहकर बचाव करना भी चाहते हैं आपकी सरकार परीक्षा के नाम पर उन्हें भी बाहर निकालने पर बाध्य कर रही है. ऐसे में अगर किसी परीक्षार्थी, उनके संग आए अभिभावक या घर लौटने के बाद उनके संपर्क में आए घर के बुजुर्गों को संक्रमण हो गया तो उसकी कीमत क्या ये सरकार चुका पाएगी .
कोरोना व बाढ़ में जबकि बस- ट्रेन बाधित है तो बच्चे दूर दूर से कैसे आएंगे. ना तो हर एक की सामर्थ टैक्सी करने की है और ना ही हर शहर में इतनी टैक्सी हैं. भाजपा के एक प्रवक्ता तो यह भी तर्क दे रहे हैं कि गरीब तो जैसे पहले प्रबंध करता वैसे अब भी करेगा. दुर्भाग्यपूर्ण .अर्थव्यवस्था के ज्ञाता वह प्रवक्ता यह भूल गए हैं कि संक्रमण के इस आपदा काल में परिवहन ,खाने -ठहरने की सेवाएं अति सीमित है ,मतलब मांग के अनुपात में आपूर्ति नगण्य होने पर सब सेवाएं बहुत अधिक दाम में मिलेंगी. ऐसे में गरीब- ग्रामीण ही नहीं बल्कि वह मां-बाप भी पैसा कहां से लाएंगे जिनको रोजगार कोरोना व बाढ़ ने छीन लिया है.
ऐसा लगता है कि भाजपा यह समझ चुकी है कि बेरोजगारी से जूझ रहा युवा तथा कोरोना,बाढ़ व अर्थव्यवस्था की बदइंतजामी से त्रस्त गरीब ,निम्न व मध्य वर्ग अब कभी उसको वोट नहीं देगा, इसलिए वह युवाओं और अभिभावकों के खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई कर रही है .भाजपा को सिर्फ वोट देने वालों से मतलब है.
नकारात्मक व हठधर्मी "बदले" कि राजनीति करने वाली भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टियों के खिलाफ देश में एक नई" *युवा क्रांति* "जन्म ले रही है. हम सब साथ हैं .आइए मिलकर कहे :
' जान के बदले एग्जाम'
नहीं चलेगा- नहीं चलेगा!!!