जनपद शाहजहांपुर में रंगों की बौछार के बीच जूते-चप्पलों से लाट साहब का हुआ स्वागत
जनपद शाहजहांपुर से जितेंद्र कुमार कश्यप की रिपोर्ट
बरेली मंडल के शाहजहांपुर होली पर शहर में लाट साहब के जुलूस निकाले गए। रंगों की बौछार के बीच भैंसा गाड़ी पर सवार लाट साहब की सवारी जिधर से निकली जूते-चप्पलों से उनका स्वागत किया गया।
बरेली मंडल के शाहजहांपुर होली पर शहर में लाट साहब के जुलूस निकाले गए। रंगों की बौछार के बीच भैंसा गाड़ी पर सवार लाट साहब की सवारी जिधर से निकली जूते-चप्पलों से उनका स्वागत किया गया।
मुख्य जुलूस चौक क्षेत्र से करीब दस बजे शुरू हुआ। चौक कोतवाली में कोतवाल प्रवेश सिंह ने लाट साहब को सलामी व नजराना दिया। उसके बाद यहां से जुलूस चारखंभा, रोशनगंज, अंटा चौराहा, खिरनी बाग, सदर बाजार पहुंचा। वहां से प्रभारी निरीक्षक से सलामी व नजराना लेने के बाद टाउनहाल स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर के बाहर लाट साहब ने माथा टेका। उसके बाद निशात टाकीज रोड, पंखी चौराहा से बहादुरगंज, घंटाघर, कच्चा कटरा, कनौजिया अस्पताल होते हुए बंगला के नीचे पटी गली में समाप्त हुआ। इस दौरान लोगों ने छतों, चौराहों, सड़कों से रंग व गुलाल की जमकर बौछार की। इसी तरह सरायकाइया, खिरनीबाग, छोटी सब्जी मंडी से भी जुलूस निकले।
इन स्थानों पर भी निकले जुलूस
शहर से सटे रोजा के बरमौला अजरुनपुर में भी जुलूस निकाला। यहां लाट साहब को गधे पर बैठाकर जूतों की माला पहनाई गई। वहीं कांट व पुवायां के बड़ागांव में भी लाट साहब को भैंसागाड़ी पर बैठाकर जुलूस निकाला गया।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
लाट साहब को हेलमेट व बॉडी प्रोटेक्टर पहनाया गया था, ताकि चोट न लगे। उनके साथ भैंसा गाड़ी पर कमेटी के सदस्यों अलावा पुलिस के जवान भी मौजूद रहे। जुलूस में कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों के अलावा रैपिड एक्शन फोर्स व पुलिस के करीब 2700 जवान तैनात रहे।
इसलिए निकलता है जुलूस
जुलूस की परंपरा 1746-47 में नवाब अब्दुल्ला खां के साथ लोगों ने होली खेलने के साथ शुरू की थी, लेकिन अब्दुल्ला खां के बाद यह परंपरा बंद हो गई। 1930 में एक बार फिर से परंपरा शुरू हुई। इन जुलूसों के जरिए लोग ब्रिटिश हुकूमत के प्रति अपना आक्रोश जताते हैं।