सोचा एक पत्रकार बनूंगा
सच्चे पत्रकारों को समर्पित लेख
जीवन में नई उमंग और उत्साह के साथ जब कार्य करने के लिए क्षेत्र का चुनाव करना था तो सोचा चलो पत्रकार बनू और समाज के लिए कुछ काम करु अपने विचारों को रखने का इससे अच्छा साधन और कोई नहीं आम जनता की सेवा तो होगी साथ ही मेरा नाम भी होगा। उस समय मोबाइल नहीं थे खबरों को कवर करने के लिए साइकिल ही सबसे उपयोगी साधन था। तो भाई लग गए एक समाचार पत्र में मेहनत और लगन से काम करना शुरू किया और पत्रकारिता की ABCD सिखाने के लिए वरिष्ठो का साथ मिला और शुरु हो गई हमारी पत्रकारिता कुछ सालों में ही बडे-बडे बैनरों में काम करने का सौभाग्य मिला।
नाम कमाया अब आगे बढ़ाने के लिए अपने समाचार पत्र का प्रकाशन शुरू किया और सफलतापूर्वक आज तक चल रहा हैं वह भी बेदाग।
बेदाग लिखना पड़ा क्योंकि अब नये दौर की पत्रकारिता देखने को मिल रही है देश में मोबाइल पत्रकार हो गए है। जिन्होने सच्चे पत्रकारों का गला दबा दिया ये तथाकथित पत्रकार थाने चौकी में अपने ही साथी पत्रकारों की बेइज्जती करने में शेखी समझते हैं। अब पत्रकारिता समाज सेवा नहीं कमाई का जरिया बन गई लोग आपकी मजबूरी से भी पैसा कमाने की फिराक में रहते है। मोबाइल पत्रकार केवल और केवल पुलिस के दलाल हैं ।
इन तथाकथित पत्रकारों के हाथ में माइक और आईडी बातों में ये देश के बड़े से बड़े पत्रकार को भी पीछे छोड़ दें और काम थाने में आने वाले पीड़ितों से दलाली करना रिपोर्ट लिखाने के नाम पर पैसे, प्रार्थना पत्र लिखने तक पैसे लेते हैं। इनका मुख्य काम चौकी थाने के आसपास जमावड़ा लगाकर बैठना और थाना इंचार्ज, चौकी इंचार्ज के लिए दलाली करना।
इस तरह के कथित पत्रकारों का अपना एक बड़ा ग्रुप है जो थाना चौकी के हिसाब से बंटा हुआ है। संचार माध्यमों का सबसे सही उपयोग कथित पत्रकार ही करते हैं। किसी खबर पर आपके घंटों की मेहनत को ये कथित पत्रकार मिनटों में अपने नाम कर लेते हैं। जहां कहीं से दलाली मिलती हो ये गैंग कि तरह पहुंच जाते हैं और वसूली शुरू हो जाती हैं जैसे कोई केस आया कथित पत्रकारों जिसको वह क्षेत्र मिला है वह तत्काल अपने साथियों को फोन करता हैं केस मैनेज कराने के नाम पर वसूली के लिए सम्पादक और प्रधान सम्पादक दौड़े दौड़े पहुंच जाते हैं और हजार दो हजार के नाम पर गौरवपूर्ण पत्रकारिता को दलाली का बदनुमा दाग लगा दिया जाता है। क्या ये पत्रकार कहलाने के लायक हैं।
अब थाना चौकी में इन कथित पत्रकारों का ही बोल बाला है इन्होने पत्रकार का मतलब दलाल बना दिया सच्चे और ईमानदार पत्रकारों को आप थाना चौकी के आसपास नहीं देखेगें साहब! कौन अपना नाम दलालो की श्रेणी में लिखवाए। अखबार के प्रकाशन सम्बंधित मेरी एक जांच दो साल पहले थाना व पुलिस चौकी में आई तो चौकी इंचार्ज फोनकर बोले आप सम्पादक है मुझे पता ही नहीं था।
कथित पत्रकारों ने पत्रकारिता की जड़ें हिला कर रख दी इस समय पत्रकारिता अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं क्योंकि कथित पत्रकारों का ग्रुप सच्चे ईमानदार पत्रकारों से ज्यादा बड़ा है। इसमें कोई सम्पादक तो कोई प्रधान सम्पादक हैं कोई बडे़ चैनल का बड़ा पत्रकार बताता है फर्जी ब्यूरो चीफ और संवाददाताओं की तो फौज खड़ी है। कुछ स्टिंगर तो अपने को चैनल हेड बताकर काम कर रहे हैं तो कुछ उनके पिछलग्गू बनकर दलाली कर रहे हैं। यहाँ सारा खेल केवल दलाली के पैसो की बंदरबांट का हैं। पीडितों का शोषण थाने पर पुलिस करती है थाने के बाहर दलाल कथित पत्रकार करते हैं।
सही और सच्ची पत्रकारिता तो कुछ गिने-चुने पत्रकार ही कर रहे हैं।
इन कथित पत्रकारों ने पत्रकारिता के नाम पर दलाली का अड्डा जगह जगह खोल रखा हैं।
मेरा उद्देश्य केवल सच्ची पत्रकारिता को जिंदा रखने का हैं। इन जैसे पत्रकारों का बहिष्कार किया जाना चाहिए
लेखनी को प्रणाम करते हुए।
🙏🏻
संजय मिश्रा
*सम्पादक- राष्ट्र नमन समाचार पत्र
*स्वमी/प्रकाशक/ मुद्राक - R.N NEWS मीडिया ग्रुप