अगर भगवान से कभी मांगना पडे तो सूर दास, बाली,गीधराज की तरह मांगना नहीं तो नहीं मांगना - स्वामी कमल दास जी बापू
अगर भगवान से कभी मांगना पडे तो सूर दास, बाली,गीधराज की तरह मांगना नहीं तो नहीं मांगना - स्वामी कमल दास जी बापू
चित्रकूट - तहसील मानिकपुर के ग्राम चर स्थित प्राचीन सिद्ध श्री सोम सरकार मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्री लइना बाबा सरकार धाम शिवरामपुर के राष्ट्रीय संत स्वामी कमल दास जी बापू ने बताया कि अगर कभी भगवान से मांगने की जरूरत पड़े तो सूरदास जी की तरह मांगना, बाली की तरह मांगना, गीधराज की तरह मांगना नहीं तो नहीं मांगना!
बापू जी ने पहला उदाहरण सूरदास जी का दिया बताया कि एक बार सूरदास जी को बहुत जोर की प्यास लगी तो एक कन्या दिखाई पड़ी सूरदास ने उससे पानी मांगा सूरदास ने पानी पिया लेकिन सूरदास जी की प्यास नहीं बुझी कन्या ने सूरदास जी से कहने लगी पिताश्री आप की प्यास कैसे बुझेगी पिताश्री का नाम सुनते हुई सूरदास के अंदर आया हुआ काम जब भाग गया तो सूरदास जी ने कन्या से कहा कि बेटी घर जा रही हो तो दो लोहे के जलते हुए अंगारे ले आओ कन्या लोहे के दो जलते हुए अंगारे लेकर के आई तो सूरदास जी ने लोहे के अंगारों से अपनी दोनों आंखें फोड़ डाली ना रहेगी आंख ना होगा पाप क्योंकि आंख ही पाप कराती हैं सूरदास जी को भगवान कृष्ण ने दर्शन दिया !
बापूजी ने दूसरा उदाहरण बाली
का देते हुए बताया कि
बाली और सुग्रीव दोनों सगे भाई थे हनुमान जी ने भगवान राम की मित्रता सुग्रीव से करा दी भगवान राम जब सुग्रीव के मित्र बन गए तो सुग्रीव से पूछते हैं कि आप यहां पर्वत पर क्यों रहते हो क्या कारण है सुग्रीव ने भगवान राम को बताया कि बाली के डर के कारण भगवान राम ने कहा वो कैसे तब सुग्रीव ने भगवान राम को बताया कि प्रभू बाली और मैं दो भाई हैं एक बार एक मायावी राक्षस हमारे गाँव आया और मेरे बड़े भाई वाली को युद्ध के ललकारने लगा बाली उस मायावी राक्षस की ललकार सुन कर घर से बाहर निकला तो वह भाग चला बाली उसके पीछे दौड़ा और मैं बाली के पीछे दौड़ा मायावी राक्षस वाली के डर के कारण एक गुफा में घुस गया तब बाली ने मुझसे कहा कि मैं इसे मारने गुफा में जा रहा हूं तुम एक हफ्ते तक गुफा के बाहर मेरा इंतजार करना अगर मैं लौट कर के ना आऊँ तो समझ जाना कि वाली मारा गया हे प्रभु मैं 1 हफ्ते के बजाय एक महीने तक गुफा के बाहर खड़े वाली का इन्तजार कर ही रहा था कि गुफा से खून की धार निकली तो मैं यह समझा कि वाली मारा गया अब यह आकर मुझे भी मार डालेगा तो मैंने बहुत बड़ी पत्थर की एक सिला उस गुफा में ढक कर अपने गाँव लौट आया जब बाली राक्षस को मार कर के आया तो प्रभू मुझे बहुत मारा और मेरी औरत छीन ली और मुझे गाँव से मार मार कर बाहर निकाल दिया!
उसी के डर के कारण मैं इस पर्वत में रहता हूं श्राप के कारण वाली इस पर्वत पर नहीं आता !
भगवान राम ने कहा कि तुम मेरी सीता का पता बाद में लगाना पहले तुम जाओ और जाकर के बाली को युद्ध के लिए ललकारो सुग्रीव भगवान राम के कहने पर बाली से युद्ध करता है! सुग्रीव युद्ध में बाली से हार कर मार खा कर के जब भगवान राम के पास वापस आता है और कहता है कि मैं आप से कहता था ना यह मेरा भाई नहीं है मेरा दुश्मन है देखो मुझे कितना मारा कितना दर्द हो रहा है मुझे ! भगवान राम सुग्रीव की सारी पीड़ा दूर कर देते हैं कृपा दृष्टि करके कहते हैं कि तुम दोनों एक रूप के थे इसलिए नहीं मारा भगवान राम सुग्रीव को सुमन की माला पहनाकर बाली से युद्ध करने के लिए फिर भेजते हैं और कहते हैं अब की बार मैं बाली को जरूर मारूंगा एक ही बाण से !
सुग्रीव फिर जाकर बाली से युद्ध करता है और भगवान राम वृक्ष की आड़ में खड़े देखते रहते हैं जब भगवान राम समझ जाते हैं कि अब सुग्रीव थक गया तो एक ही बाण बाली को मार देते हैं बाली गिर जाता है तब भगवान राम बाली के सामने खड़े हो जाते हैं भगवान राम को देखकर के बाली बड़ा प्रसन्न होता है कहता है कि आप राम हो मर्यादा पुरुषोत्तम हो आपने मुझे छिपकर के मारा यह सुनकर भगवान राम बाली से प्रसन्न हो जाते हैं और वरदान मांगने को कहते हैं कहते हैं कहो मैं तुम्हें अचल कर दूं कहो तो मैं फिर से तुमें जिंदा कर दूं तब बाली भगवान राम से कहता है कि हे प्रभू मेरी मौत आपके सामने हो रही है क्या ऐसी मौत मुझे दोबारा दे सकते हो भगवान राम ने कहा कि नहीं तब बाली ने कहा कि ये मेरे पुत्र अंगद को अपनी सेवा में ले लो और मुझे अपने धाम भेज दो भगवान राम ने बाली को अपने धाम भेज दिया!
बापूजी ने तीसरा उधारण गीधराज ( जटायु)का दिया मांस खाने वाला जटायु कभी जप नहीं किया कभी तप नहीं किया कभी व्रत नहीं किया लेकिन अपने जीवन में बार एक अच्छा काम किया सीता को जब रावण हरण करके पुष्पक विमान से लंका ले जा रहा था सीता की विलाप को सुनकर के गीधराज सीता को बचाने के लिए रावण के साथ युद्ध करता है और एक क्षण के लिए रावण को मूर्छित कर देता है तब रावण गुस्से में आकर गीधराज के दोनों पंख काट देता है जिसके कारण गीधराज आसमान से नीचे गिर जाता है लेकिन भगवान राम की कृपा से मरता नहीं है भगवान राम अपने हाथों में उठा लेते गीधराज बहुत प्रसन्न होता है कि परमात्मा राम ने मुझे अपने हाथों में उठा लिया मैंने कभी जप नहीं किया कभी तप नहीं किया कभी व्रत नहीं किया!
भगवान रोते हुए गीधराज से कहते हैं मेरी पत्नी सीता के लिए तुम रावण से लड़े इसलिए आप की यह दुर्दशा हुई है आज ये राम तुम्हारा आजीवन गीधराज ऋणी हो गया मांगो क्या मांगते हो गीधराज ने भगवान राम से कहा हर जन्म में मैं आपका भक्त रहूं और आपकी मेरे ऊपर हमेशा कृपा बनी रहे! दिनांक 28 जून 2021 को भगवान कृष्ण की माखन लीला, रासलीला, गोवर्धन पूजन, तथा कंस वध की कथा सुनाई जाएगी!