पेड़ पौधों में भी जीवन है, पर्यावरण को बचाएं
ऐसा बताने वाले बसु का मनाया गया जन्मदिन।
गंजडुंडवारा नगर के कैनाल रोड स्थित हरनारायन इण्टर कालेज में डॉ जगदीश चंद्र बसु के जन्मदिन पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कालेज के प्रधानाचार्य धर्मेन्द्र कुमार ने की अखिल भारतीय मीडिया फाउंडेशन के प्रदेश महासचिव अनिल सिंह राठौर ने बताया कि आज भारत के बनस्पति विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ जगदीश चंद्र बसु का जन्मदिन है।
डॉ॰ (सर) जगदीश चन्द्र बसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्हें भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान तथा पुरातत्व का गहरा ज्ञान था।वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। वनस्पति विज्ञान में उन्होनें कई महत्त्वपूर्ण खोजें की। साथ ही वे भारत के पहले वैज्ञानिक शोधकर्त्ता थे। वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने एक पेड़ पौधों में भी जीवन है, पर्यावरण को बचाएं
ऐसा बताने वाले बसु का मनाया गया जन्मदिन।
गंजडुंडवारा नगर के कैनाल रोड स्थित हरनारायन इण्टर कालेज में डॉ जगदीश चंद्र बसु के जन्मदिन पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कालेज के प्रधानाचार्य धर्मेन्द्र कुमार ने की अखिल भारतीय मीडिया फाउंडेशन के प्रदेश महासचिव अनिल सिंह राठौर ने बताया कि आज भारत के बनस्पति विज्ञान के वैज्ञानिक डॉ जगदीश चंद्र बसु का जन्मदिन है।
डॉ॰ (सर) जगदीश चन्द्र बसु भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक थे जिन्हें भौतिकी, जीवविज्ञान, वनस्पतिविज्ञान तथा पुरातत्व का गहरा ज्ञान था।वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया। वनस्पति विज्ञान में उन्होनें कई महत्त्वपूर्ण खोजें की। साथ ही वे भारत के पहले वैज्ञानिक शोधकर्त्ता थे। वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने एक अमरीकन पेटेंट प्राप्त किया। उन्हें रेडियो विज्ञान का पिता माना जाता है।वे विज्ञानकथाएँ भी लिखते थे और उन्हें बंगाली विज्ञानकथा-साहित्य का पिता भी माना जाता है।उन्होंने अपने काम के लिए कभी नोबेल नहीं जीता। इनके स्थान पर 1909 में मारकोनी को नोबेल पुरस्कार दे दिया गया।इस अवसर पर
ओम प्रकाश राजन सक्सेना ओमनारायण, चन्द्रभान सिंह, संजीव कुमार प्रतीक अग्रवाल संजय दीक्षित विवेक यादव, एवरन सिंह, उपस्थित रहे पेटेंट प्राप्त किया। उन्हें रेडियो विज्ञान का पिता माना जाता है।वे विज्ञानकथाएँ भी लिखते थे और उन्हें बंगाली विज्ञानकथा-साहित्य का पिता भी माना जाता है।उन्होंने अपने काम के लिए कभी नोबेल नहीं जीता। इनके स्थान पर 1909 में मारकोनी को नोबेल पुरस्कार दे दिया गया।इस अवसर पर
ओम प्रकाश राजन सक्सेना ओमनारायण, चन्द्रभान सिंह, संजीव कुमार प्रतीक अग्रवाल संजय दीक्षित विवेक यादव, एवरन सिंह, उपस्थित रहे