*कचरे और गोबर की खाद से सरसब्ज हुआ ‘किचन गार्डन’*
तिंदवारी। घर के कूड़े कचरे से तैयार की गई खाद में किचन गार्डन की बेल लगातार पनप रही है। कुछेक गांवों से शुरू हुआ घरेलू बागवानी का यह शौक अब लगभग एक सैकड़ा घरों तक फैल चुका है। बिना किसी खाद के जैविक खाद से उगाई जा रही सब्जियां घरों की थाली में परोसी जा रही हैं।
आर्गेनिक (जैविक) फार्मिंग को बढ़ावा देने वाली एक फर्म की प्रेरणा से क्षेत्र के पिपरगवां, भुजौली, वासिलपुर, महुई, भुजरख, छिरहुंटा और महेदू आदि गांवों में इन दिनों किचन गार्डन में खूब सब्जियां पैदा हो रही हैं। इनमें किसान अपने घर के कूड़े-कचरे और जानवरों के गोबर से बनी खाद इस्तेमाल कर रहे हैं। फार्मिंग कर्मी अपने निर्देशन में किचन गार्डन तैयार करा रहे हैं।फील्ड आफीसर भइयाराम मौर्या ने बताया कि खेत के छोटे से हिस्से में सब्जी पैदा कराई जा रही है। यह घर के इस्तेमाल के लिए काफी तो है ही साथ ही स्वादिष्ट और गुणवत्तापूर्ण है। इसमें जैविक खाद का इस्तेमाल हो रहा है। सब्जी में कोई रोग या कीड़ा लगने पर घर के चूल्हे की राख और जानवरों के मूत्र से तैयार किए गए रसायन का छिड़काव किया जाता है।
भुजरख गांव की महिला किसान शिववती ने बताया कि वह अब बाजार से सब्जी नहीं खरीदती। खेत के एक हिस्से में बने किचन गार्डन से पर्याप्त सब्जी मिल रही है। वह खुद जैविक खाद तैयार करती है। सैमरी के किसान राम सिंह ने बताया कि जैविक खाद से अपने खेत में पैदा की जा रही सब्जियां स्वादिष्ट भी होती हैं। भुजौली के अनिल सिंह ने भी किचेन गार्डन को अपनाकर घर की सब्जी का जुगाड़ कर लिया है।