*तिदवारी : हिदू और मुस्लिम एकता के प्रतीक काले शहीद बाबा का 43वां उर्स हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।*/ कोरोना के कारण बीते दो वर्षों से उर्स नहीं मनाया गया था। कार्यक्रम में जवाबी कव्वाली व शेरो-शायरी का लोगों ने आनंद लिया। अलसुबह से कुरआन ख्वानी, गुस्ल चादरपोशी का दौर चलता रहा। इस दौरान अकीदतमंद ने जहां फातिहा पढ़कर मुल्क में अमन चैन की दुआ मांगी। वहीं, जायरीनों ने बाबा के मजार पर फूल इत्र भी चढ़ाया। गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल काले बाबा का सालाना उर्स मनाया गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा के दरबार में जो भी मुराद मांगी जाती हैं वह जरूर पूरी होती हैं। उर्स के दौरान खिलौने और खानपान की दुकानें काफी गुलजार रहे। इस दौरान जायरीनों को शर्बत पिलाने के लिए सामाजिक संस्थाओं का जमावड़ा भी दिखा। कानपुर के कव्वाल टीवी व रेडियो सिगर शरीफ परवेज और बरेली की कव्वाल टीवी व रेडियो सिगर शीबा साबरी के बीच हुई जवाबी कव्वाली एवं शेरों शायरियों ने रात भर लोगों बांधे रखा। कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद साबिर, अय्यूब कुरैशी, इस्माइल, याकूब खान, बुल्लू बाबा, सलीम, रामबाबू सोनी, भूरेलाल फौजी, ब्रजेश पटेल...