'बच्चों की मृत्यु दर रोकने के लिए दक्ष स्टाफ की जरूरत'- डॉ.डी नाथ
नवजात शिशु के पुनर्जीवन पर कार्यशाला का हुआ आयोजन
जालौन
उरई।राजकीय मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग एवं भारतीय बाल रोग अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में सेंट्रल लाइब्रेरी स्थित कांफ्रेस हॉल में नवजात शिशु के पुनर्जीवन पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य डॉ.डी नाथ ने बताया कि हमारे देश में नवजात बच्चों की मृत्यु दर अन्य विकासशील देशों की तुलना में अधिक है।जिसे कम करने के लिए हमें उपाय करने हैं।उनमें से एक उपाय नवजात शिशुओं के पुनर्जीवन पर कार्यशाला आयोजित कर नए चिकित्सकों को इसके लिए प्रशिक्षित करना है।झांसी बाल रोग अकादमी के अध्यक्ष डॉक्टर जीएस चौधरी ने बताया कि हमारे देश में लगभग 2 लाख बच्चे हर साल 24 घंटे के अंदर हो अपना दम तोड़ देते हैं।अगर हमारे पास प्रशिक्षित चिकित्सक एवं स्टाफ नर्स बच्चों के जन्म के समय मिल जाएं तो ऐसी मृत्यु को कम किया जा सकता है, जिसमें ऐसी कार्यशालाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। बाल रोग विभाग सहायक आचार्य डॉ छवि जायसवाल ने कहा कि नवजात बच्चों के पुनर्जीवन के बारे में सभी चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों को जानकारी होनी चाहिए। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ विद्या चौधरी ने बताया कि बच्चों के पुनर्जीवन की प्रक्रिया के पहले मां में होने वाले गर्भावस्था की समस्याओं के बारे में जानकारी कर उचित तैयारी करनी चाहिए। डॉक्टर दीपक सिंह ने बच्चों के सामान्य देखभाल के बारे में विस्तार से चर्चा की। इस दौरान उप प्राचार्य डॉ आरएन कुशवाहा, डॉ अपूर्व अग्रवाल, डॉ दीपक सिंह, डॉ माशूक सिद्दीकी, डॉ मदन, डॉ मोनू यादव, डॉ सुधांशु शर्मा आदि मौजूद रहे।