चार पीढियों से दिव्यांगता का अभिशाप झेल रहा है जालौन का एक परिवार
कदौरा ब्लाक के ग्राम बरखेरा में एक ऐसा परिवार है जो दिव्यांगता के अभिशाप से पिछले चार पीढ़ियों से जूझ रहा है इस परिवार के सदस्यों के खून के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए थे ताकि इस आनुवंशिक समस्या का कारण तलाश कर निदान के उपाय किए जाएं जिससे इस परिवार में आने वाली पीढ़ियां दिव्यांगता के अभिशाप से बच सकें लेकिन गरीबी के कारण इस कवायद का अभी तक कोई निष्कर्ष उजागर नहीं किया गया है परिवार को मजबूत पैरवी दरकार है मजबूत पैरवी की दरकार इसके लिए है|
परिवार की उक्त परिवार के हरि शंकर उर्फ मंटू राठौर में बताया कि उनके पिता काशीराम पूरी तरह से स्वस्थ थे लेकिन उन्होंने मा रामप्यारी को अपनाया जो दिव्यांग थी इसके कारण पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार में संताने दिव्यांग पैदा होती चली गई हालांकि कुछ संताने इस अभिशाप की छाया से बच भी गई थी आज इस परिवार के सिलसिले चार पीढ़ियां गुजर चुके हैं लेकिन दिव्यांगता का अंत नहीं हो पा रहा है मंटू राठौर ने बताया के सन 2006 में परिवार के सदस्यों के खून के नमूने मुख्य चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में कोशिकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र हैदराबाद में परीक्षण के लिए भेजे गए थे जहां से बताया गया कि इस पर
शोध चल रही है जैसे ही कोई नई जानकारी होगी सूचित किया जाएगा परिवार इस संबंध में कोई पैरवी नहीं कर सका जिसके कारण शोध का निष्कर्ष क्या रहा यह अज्ञात है और इससे परिवार को दिव्यांगता से निजात दिलाने के दरवाजे बंद चले आ रहे हैं इस बीच परिवार में दिव्यांगता की शिकार चौथी पीढ़ी सामने आ चुकी है क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति शुरू से दैनीय थी हालांकि बाद में परिवार के दिव्यांग सदस्यों को पेंशन की सुविधा सरकार से मिली है लेकिन वह ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर है इस कारण परिवार के सदस्यों को बुरी हालत में जीवन गुजारना पड़ रहा है| उधर नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन आफ एंप्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल (एन सी पी ई डी पी) के फेलो जाविद खान की भेंट इस परिवार से हुई तो उन्होंने इसकी दिव्यांगता का समुचित परीक्षण के लिए पैरवी का आश्वासन दिया है उन्होंने यह भी कहा कि वे जनप्रतिनिधियों से मिलकर परिवार को स्वरोजगार हेतु सरकारी सहायता दिलाने का प्रयास करेंगे |