11वें उर्स-ए-फ़नाफिल मुर्शिद के मौके पर देश की कई खानकाहों के सज्जादाओं ने फरमाई शिरकत
पीलीभीत
खानकाहे उस्मानिया क़दीरिया मोहल्ला शेर मुहम्मद के सज्जादा नशीन हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ़्ती हसन मियाँ क़िब्ला क़दीरी के वालिद हज़रत सूफ़ी अश्शाह अल्हाज मुहम्मद उस्मान मियाँ क़िब्ला क़दीरी र.अ. के 11वें उर्स-ए-फ़नाफिल मुर्शिद के मुबारक मौके पर एक अज़ीमुशशान हज़रत ईमामे आज़म कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें उर्स के आयोजक व खानकाहे उस्मानिया क़दीरिया के सज्जादा नशीन हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ़्ती हसन मियाँ क़िब्ला क़दीरी की मौजूदगी में तमाम मेहमानों ने अपने-अपने कलाम पेश किये। बरेली से आये मेहमान शायर जनाब रज़ी क़ादरी साहब ने अपने कलाम से जलसे में समां बांध दिया। वहीं कार्यक्रम में मकनपुर से तशरीफ़ लाये शायरे इस्लाम बुलबुले बागे मदीना हज़रत अल्लामा अश्शाह अल्हाज सैय्यद रुहुल मुनअम जाफरी मदारी साहब ने अपने कलाम से ऐसा समाँ बाँधा की हर तरफ से लब-बैक या रसूलल्लाह लब-बैक या रसुलल्लाह की सदायें गूँजने लगी महफिल में हर कोई हाथ उठाकर नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर का नारा लगाने पर मजबूर हो गया।
वहीं कार्यक्रम में दिल्ली से आये मेहमान मुक़र्रिर इस्लामी स्कालर प्रोफेसर डॉक्टर हाफिज़ुर्रहमान मिस्बाही साहब की तक़रीर लोगों के दिलों पर नक्श कर गई। उन्होंने अपनी तक़रीर में बताया कि अपने मुल्क से वफ़ादारी ईमान का हिस्सा है जो अपने मुल्क से गद्दारी करता है उसका ईमान नहीं और जिसका ईमान नहीं वह मुस्लमान नहीं और उन्होंने अपनी तक़रीर में फ़रमाया कि कोई अच्छा काम करता है तो उसकी तारीफ करना चाहिये। आपने बताया कि अभी जल्दी में ही कुछ साम्प्रदायिक लोगो ने हमारे देश के माहौल को ख़राब करने की नियत से अयोध्या में माहौल ख़राब करने की कोशिश की थी। मगर सरकार की सूझ-बूझ और ईमानदारी से सही फैसला और सच्चाई से निष्पक्ष जाँच करते हुए सही दोषियों के चेहरों को बेनक़ाब किया जिससे हमारे देश में अमन-चैन बना रहा। यह एक अच्छा कार्य था जिसका हर मुस्लमान बल्कि हर सच्चे देश-भक्त को ऐसे कार्य के लिए सरकार का धन्यवाद करना चाहिए। सरकार के हर अच्छे कार्य के लिए उनका मनोबल बढ़ाना चाहिये प्रोफ़ेसर साहब ने अपनी तक़रीर में महिलाओं के लिए अच्छे और नर्म मिज़ाज रखने को नबी स.अ.व की सुन्नत बताते हुए अपनी तक़रीर से महफिल में मौजूद मेहमानो को इल्म का जाम पिलाया।
साहिबे सज्जादा कार्यक्रम के आयोजक ने मुल्क और शहर व आवाम के लिए दुआ फरमाई देर रात ग़ुस्ल दिया गया सुबह बाद नमाज़े फजर क़ुरान ख्वानी की गयी व सुबह 10:40 पर ख़ास विसाली क़ुल हुआ जिसमें दूर-दराज से आये मेहमानों ने हिस्सा लिया जिसमें खुसूसी तौर पर हुज़ूर शाहजी मुहम्मद शेर मियाँ र.अ. के पीरों मुर्शिद की खानकाहे अहमदिया भटपूरा शरीफ से तशरीफ़ लाये शहज़ादा-ए- सैय्यद अब्दुल अज़ीज़ मियाँ साहब, हज़रत सूफ़ी ज़ुबैर मियाँ, हज़रत मौलाना महफूज़ मियाँ साहब, दरबारे शाहजी से शैखुल हुफ्फाज़ जनाब हफ़ीज़ मियाँ शेरी, जनाब नफीस मियाँ शेरी, खानकाहे जाम-ए-अनवर साबरी चिश्ती भूरे खां के साहिबे सज्जादा सूफ़ी बिलाल चिश्ती साबरी साहब, मेहमान शायर हाफ़िज़ यूनुस क़दीरी हैदराबाद ने अपने कलाम से महफ़िल में मौजूद मेहमानों को रूहाँसा कर दिया, रामपुर, बरेली, बाजपुर मुरादाबाद मुंबई आदि जगहों से हज़ारों मुरीदों ने हिस्सा लिया बाद क़ुल शरीफ लंगर खिलाया गया।