राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगांठ पर छात्रों ने एलईडी पर देखा प्रधानमंत्री का कार्यक्रम।
कांसगज
गंजडुण्डवारा, नगर के थाना रोड स्थित परिषदीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगांठ पर अखिल भारतीय शिक्षा समागम कार्यक्रम में प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी ने सम्बोधित करते हुए बताया कि
भारतीय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में कहा गया है कि 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिये अनिवार्य एवं नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था की जाए। 1948 में डॉ॰ राधाकृष्णन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का गठन हुआ था। तभी से राष्ट्रीय शिक्षा नीति का निर्माण होना भी शुरू हुआ था। कोठारी आयोग (1964-1966) की सिफारिशों पे आधारित 1968 में पहली बार महत्त्वपूर्ण बदलाव वाला प्रस्ताव इन्दिरा गांधी के प्रधानमन्त्री काल में पारित हुआ था।
अगस्त 1985 'शिक्षा की चुनौती' नामक एक दस्तावेज तैयार किया गया जिसमें भारत के विभिन्न वर्गों (बौद्धिक, सामाजिक, राजनैतिक, व्यावसायिक, प्रशासकीय आदि) ने अपनी शिक्षा सम्बन्धी टिप्पणियाँ दीं और 1986 में भारत सरकार ने 'नई शिक्षा नीति 1986' का प्रारूप तैयार किया। इस नीति की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण विशेषता यह थी कि इसमें सारे देश के लिए एक समान शैक्षिक ढाँचे को स्वीकार किया और अधिकांश राज्यों ने 10 + 2 + 3 की संरचना को अपनाया। इसे राजीव गांधी के प्रधानमन्त्रीत्व में जारी किया गया था।
इस अवसर पर विद्यालय के इंचार्ज प्रधानाध्यापक मुहम्मद काशिफ निसार अहमद अनिल राठौर अजमत अली ज्ञानेंद्र सिँह सहित छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।