स्वयं सहायता समूह से जुड़कर दिव्यागजनों के बढते कदम।
जालौन
जाविद खां नेशनल सेंटर फॉर प्रमोशन आफ एंप्लॉयमेंट फॉर डिसेबल्ड पीपल (एन सी पी ई डी पी) नामक संस्था द्वारा संचालित जावेद आबिदी फेलोशिप में एक फेलो के रूप में जिले में कार्य कर रहे हैं। इस फेलोशिप के जरिए फेलो दिव्यांगो से जुड़े रोजगार व स्वरोजगार पर शोध कार्य करते हुए उसके निष्कर्षों और समाधानों को खोजने के लिए कार्य कर रहे हैं। शोध के दौरान ब्लाक महेवा के मुसमरिया, सोहरापुर चुर्खी इन ग्राम में दिव्यांगों से मिले और जाना कि किस प्रकार वे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। दिव्यांग जनों को सरकार के द्वारा चल रही योजनाओं के बारे में जानकारी दी और स्वयं सहायता समूह बनाने की जानकारी दी।
जिसमें कुछ पंचायतों में दिव्यांग जनों के स्वयं सहायता समूह चल रहे हैं और वे अपना स्वरोजगार कर रहे हैं प्रयास है कि जो दिव्यांग रह गए हैं उन्हें संगठित कर स्वयं सहायता समूह से जोड़ा जाए ताकि वे भी जुड़कर सरकार की योजनाओं का लाभ ले सके। हमारा प्रयास है कि हम पूरे जिले में हर दिव्यांग को जागरूक कर सके और उनके हक अधिकारों की जानकारी दे सकें ।
जिससे अपने जीवन में होने वाली समस्याओं को स्वयं समाधान कर सके। मेरी कोशिश है कि पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक पदाधिकारियों से संपर्क कर ज्यादा से ज्यादा दिव्यांग साथियों को लाभ दिलाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि वे सशक्त होकर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें। ग्रामीण स्तर पर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से दिव्यांगजनों को उनकी अजीविका और उनके आय के साधनों में बढ़ोतरी की जा सकती है जिससे वह भिन्न-भिन्न तरह के रोजगार व व्यवसाय तलाश सकते हैं साथ ही उनके जीवन और भविष्य को नई दिशा मिलेगी।