ओवरलोड ट्रैक्टर ट्राली धड़ल्ले से दौड़ रही हैं सड़कों पर, क़ृषि कार्य के नाम पर कमर्शियल उपयोग
लखनऊ
ट्रैक्टर ट्राली किसानों के लिए बनाया गया वाहन है लेकिन किसानों से ज्यादा अब उसका उपयोग कमर्शियल कार्य के लिए हो रहे हैं ।
इस मंहगाई के दौर में ट्रैक्टर और ट्राली को गरीब किसान खरीदने की क्षमता नहीं रखता क्योंकि किसान को घर चलाने में ही परेशानियां का सामना करना पड़ता हैं तो वह लोन पर लिए ट्रैक्टर की किश्त कैसे जमा कर पाएगा। बैंक की किश्त जमा नहीं हुई तो रिकवरी एजेन्ट परेशान करते हैं वह अलग।
इसलिए ट्रैक्टर-ट्रॉली का ज्यादा उपयोग कामर्शियल हो रहा है सड़कों पर धड़ल्ले से सीमेंट, मौरंग, बालू , ईटा सरिया, मिट्टी व अन्य कई कार्यों में लगे हुए हैं।
यह इसलिए है कि सीमेंट का कारोबार करने वाले व्यापारी एक ट्रक के बराबर ओवरलोड भार लोड करते हैं और बेखौफ सड़कों पर ट्रैक्टर ट्राली दौड़ा रहे हैं कृषि कार्य हेतु लिखकर कमर्शियल कार्य करते हैं और सरकार को राजस्व का चूना लगा रहे हैं।
लखनऊ के आस पास के दुकानदारों ने ट्रक की जगह ट्रैक्टर ट्राली खरीद रखें हैं जिससे वह लोग व्यवसायिक उपयोग करते हैं।
लखनऊ के ग्रामीण क्षेत्रों के आसपास जो कमर्शियल वाहन है उनमें ज्यादा वाहन ट्रैक्टर ट्राली है जिनका पूरे लखनऊ में कमर्शियल उपयोग हो रहा हैं। लगता है जानबूझकर कोई भी परिवहन विभाग का अधिकारी और पुलिस प्रशासन के अधिकारी इस ओर से आंखें बंद कर लेता है।
ओवरलोडिंग के मामले में ट्रैक्टर ट्राली बुद्धेश्वर से लेकर के आलमबाग के पूरे क्षेत्र में 100 कुंतल सीमेंट लेकर चलते हैं जबकि इनको कृषि कार्य हेतु लिया गया होता है जबकि इनका कमर्शियल उपयोग हो रहा है और यह वाहन शहर के अंदर के प्रतिबंधित है फिर भी बड़े आराम से चल रहे हैं। इसी तरह मलिहाबाद, सरोजनी नगर, मोहनलाल गंज, गोसाईगंज, चिनहट, बक्शी का तालाब, इटौंजा और दुबग्गा के क्षेत्रों में यह खेल सड़को पर देखा जा सकता है।