किसकी लापरवाही के कारण लोग नहीं कर सके अपने मत का उपयोग।
राष्ट्र निर्माण में सहयोग देने से चूके मतदाताओं में रोष
लखनऊ।
लोकसभा चुनाव का दिन 20/05/2024/ के दिन बड़ी संख्या में लोगो ने निभाई अपनी ज़िम्मेदारी सुबह से लाइन में लगकर वोट डाले पर कुछ लोगों को यह मौका नहीं मिला क्योंकि उनका नाम लिस्ट से गायब था नये वोटर जिनका नाम शामिल होना था उनमें से भी बहुत से बच्चे वोटर नहीं डाल सके क्योंकि उनका नाम अभी में नहीं आया था।
हर बार कि तरह इस बार भी लोगों के परिवार के परिवार वालों के नाम लिस्ट से गायब थे और जिन लोगों का निधन हो चुका है उनके नाम वोटर लिस्ट में हैं।
वहीं लोगों का कहना है हम लोग सुबह से कड़ी धूम में खड़े हुए हैं जब नम्बर आता है तो पता ये चलते हैं के लिस्ट में नाम नहीं है घर में दस लोग हैं तो चार लोगों के नाम है 6 लोगों के नाम लिस्ट में से गायब जबकि सरकार की ओर से बयान दिया गया था कि अपनी जिम्मेदारी को निभाने के लिए मतदान जरूर करें और अपना वोट डालने जाए अपना वोट खराब नहीं करें ।
फिर क्या था लोगों में मतदान करने का जोश भर गया और लोग अपनी जिम्मेदारी निभाने मतदान केंद्र पहुंचे जिसमें वरिष्ठ नागरिक, महिलाएं- पुरुषों के साथ नये मतदाताओं का सारा जोश ठंडा हो गया जब घंटों लाइन में लगने के बाद पता चला कि उनके स्वर्गीय परिजनों का नाम है पर जीवित लोगों के नाम गायब है। नये मतदाताओं को भी मायूसी के साथ वापस आना पड़ा यदि एक घर में 10 लोगों का परिवार रहता हैं तो 5-6 लोगों के ही नाम वोटर लिस्ट में शामिल मिलें।
यह पहली बार नहीं है कि इस तरह की गलती हो रही हो इस बार तो जिस तरह से तैयारी चल रही थी की वोटर लिस्ट एकदम ठीक ठाक होगी सभी वोटरों के नाम होंगे और जो नाम हटाएं जाने हैं वो हटा दिए जाएंगे पर फिर वहीं "ढांक के तीन पात" वाली कहावत चरितार्थ होती हैं ना तो ठीक से नये वोटर जोड़े गए और ना ही नाम कांटे गए तो फिर पिछले दो साल से बीएलओ क्या रिपोर्ट बना रहे थे यदि बीएलओ ने अपना काम सही किया तो जिला निर्वाचन कार्यालय के कर्मचारियों ने वोटर लिस्ट में संसोधन कर नयी लिस्ट जारी क्यों नहीं की और बीएलओ के द्वारा दी गई लिस्ट की जांच क्यों नहीं हुई राष्ट्रीय निर्वाचन आयोग इस तरफ आंखें बंद क्यों किए हैं। अब इसे ग़लती कहें या लापरवाही पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि ये लापरवाही या गलती किसकी है और क्या इसके लिए कोई जांच होगी। करोड़ों पानी में बहा देने के बाद भी पुरानी लिस्ट से चुनाव कराने वाले कटघरे में खड़ा किए जाएंगे या उन्हें इस लापरवाही के लिए कोई जवाब नहीं देना होगा और आम जनता की करोड़ों की गाढ़ी कमाई व्यर्थ बर्बाद करके फिर टहलते नजर आएंगे।
हां एक बात और इस चुनाव में देखने को मिली कि कुछ लोगों के घरों पर पार्टियों की ओर से पर्ची भेजी गई थी उसके बाद भी वोटर लिस्ट से उनका नाम गायब था।
वहीं लोगों ने बताया कि जो लोग इस दुनिया से जा चुके हैं उनके नाम है जो दुनिया में है जिनका आधार और निर्वाचन कार्ड बना है राशन कार्ड पर सबके नाम चढ़े होने के बावजूद लोगों के नाम गायब है।
फिर दो तीन साल से कौन सी मतदाता सूची तैयार हो रही थी जब बरसों पुरानी लिस्ट के आधार पर ही चुनाव कराना था तो इस तरह के नाटक की जरूरत क्यों पड़ी।
देखने वाली बात यह है कि ऐसी लापरवाही क्यों बरती गई निर्वाचन आयोग और बीएलओ अपनी जिम्मेदारी को सही तरीके से नहीं निभाई जो दावें मतदाता सूची को लेकर किए जा रहे थे सब किस्से निकले आधी अधुरी वोटर लिस्ट तैयार कर मतदान करा दिया गया मतदाताओं के साथ धोखा देने वाले गुनाहगार कौन है बुजुर्ग मतदाताओं को कौन समझाए कि उनका नाम नहीं है पर दस पन्द्रह साल पहले गुज़रे उनके पिता का नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं। बहुत से लोग बिना वोट डाले ही अपने घर लौट गए कहीं कहीं तो मतदान नहीं कर पाने से निराश लोगों की बीएलओ से झड़प भी हो गई। तो उनका जवाब यही मिला के जब आपका नाम लिस्ट में नहीं है तो मैं क्या करूं।
इस भीषण गर्मी में मतदान करने आए लोगों को और भी परेशानियों का सामना करना पड़ा कुछ जगहों पर पीने के पानी की व्यवस्था नहीं थी लोग पानी के लिए तरसते रहे जिनमें बुजुर्ग महिला व पुरुष तथा महिलाएं को ज्यादा परेशानी हुई।
वही जब वोटिंग लिस्ट में गड़बड़ी को लेकर हमारी बात अमीनाबाद से पूर्व पार्षद आसिफ उल्ला खां से हुई तो उन्होंने भी वोटर लिस्ट से अपने परिवार के लोगों के नाम कटे होने के बारे में बताया और साथ ही बोला के हर साल वोटर लिस्ट सही करने के लिए सरकार की ओर से करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं मगर कोई फायदा नहीं होता अब ये जिम्मेदारी आम आदमी को उठानी होगी।