उत्तर प्रदेश में भाजपा कि हार की समीक्षा बैठक हुई शुरू उम्मीदवारों ने बंद लिफाफे में सबूत पेश कर बताएं कारण।
उत्तर प्रदेश में भाजपा कि हार की समीक्षा बैठक हुई शुरू उम्मीदवारों ने बंद लिफाफे में सबूत पेश कर बताएं कारण।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा की करारी हार के बाद जारी घमासान रुकने का नाम नहीं लें रहा सभी हारे हुए उम्मीदवार दूसरों पर ठीकरा फोड़ रहे हैं कोई भी आगे आकर अपनी जुम्मेदारी नहीं लें रहा वैसे तो भारतीय जनता पार्टी ने इन प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में उतारा था उसी दिन से जनता ने भाजपा की उस क्षेत्र में हार तय कर दी थी। शीर्ष नेतृत्व भी जनता क्या चाहती हैं या तो समझ नहीं सका या उसे अपने प्रत्याशी से ज्यादा मोदी जी के मैजिक पर भरोसा था खैर उनकी सोच उनपर छोड़ते हैं।
प्रदेश भाजपा संगठन ने हार की समीक्षा शुरू कर दी है। अवध क्षेत्र के हारे उम्मीदवारों के साथ पहली बैठकें हो रही हैं जिसमें हारे हुए लगभग सभी उम्मीदवारों ने विधायकों और कार्यकर्ताओं पर ठीकरा फोड़ा है।
लोकसभा चुनाव में भाजपा के हारे हुए प्रत्याशियों ने अब एक सुर में खुद के खिलाफ विरोधी लहर होने की वजह से हुई हार का ठीकरा विधायकों और कार्यकर्ताओं पर फोड़ना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश संगठन ने क्षेत्रवार भाजपा की हार की समीक्षा शुरू कर दी है और सभी प्रत्याशियों से इस विषय पर विस्तृत चर्चा करने की योजना पर कार्य शुरू कर दिया सबसे पहले हारे हुए उम्मीदवार से हार के कारणों पर चर्चा होगी यदि भितरघात हुइ है तो सबूत के साथ जानकारी देने कि बात कही गई हैं।
इसी विषय को लेकर बृहस्पतिवार को अवध क्षेत्र के हारे हुए प्रत्याशियों को बुलाकर हार के कारणों की जानकारियां प्राप्त की गई थी। अधिकांश प्रत्याशियों ने संसदीय क्षेत्र के विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं पर भितरघात करने के साथ ही विपक्ष के आरक्षण खत्म करने और संविधान बदलने के मुद्दे को भी हार की वजह बताई है।
प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने अवध क्षेत्र की एक-एक सीट पर हार की समीक्षा करने की योजना पर जमीनी स्तर पर योजना बनाई हुई है। गुरुवार को बुलाई गई बैठक में बाराबंकी की प्रत्याशी रही राजरानी रावत नहीं पहुंची थी, जबकि श्रावस्ती, सीतापुर, खीरी, लखीमपुर, रायबरेली, फैजाबाद, अंबेडकरनगर, मोहनलालगंज से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी मुख्यालय पहुंचे थे और अपनी हार के कारण की जानकारी पर चर्चा की।
बता दें कि इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा 29 सीटें हार गई, इनमें मौजूदा 26 सांसद शामिल हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद हारे हुए उम्मीदवारों ने प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से अपने ही लोगों के भितरघात करने की शिकायत की थी। इस पर इन लोगों से लिखित शिकायत मांगी गई थी।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश मुख्यालय पहुंचे कुछ उम्मीदवारों ने बंद लिफाफे में सबूत सहित हार के कारण बताएं हैं। कई उम्मीदवारों ने तो पार्टी से पूर्व विधायक रहे लोगों पर भी चुनाव में भितरघात करने के आरोप लगाया और उनके खिलाफ सबूत भी पेश किया है और कहा है कि केवल व्यक्तिगत कारणों से मुझे हरवाने के लिए साजिश रची गई साथ ही यह भी बताया है विपक्ष द्वारा प्रचारित किए गए आरक्षण खत्म करने और संविधान बदलने के मुद्दे से दलित नाराज हो गए साथ ही भाजपा का अपना कोर वोटर रहे गैर यादव पिछड़ी जातियों ने भी भाजपा को वोट नहीं दिया। खास तौर कुर्मी, राजभर, शाक्य, पासी और मौर्या जैसी भाजपा समर्थक जातियों ने इस बार के चुनाव में भाजपा से दूरी बना ली थी जिसके कारण भी भाजपा को वोटों का भारी नुक़सान हुआ। कई उम्मीदवारों ने अपनी हार की ठीकरा स्थानीय कार्यकर्ताओं व नेताओं पर भी फोड़ा।
उम्मीदवारों का कहना है कि वोटरों घर से निकालने में कार्यकर्ता मन से नहीं जुटे उनका कहना था कि बूथ कमेटियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने उस तरह से काम नहीं किया जिससे चुनाव जीते जाते हैं। सिर्फ कागजों पर ही कार्यक्रम चलाए गए बैठकों में हां में हां मिलाते रहें मतदाताओं से संपर्क नहीं किया गया जैसा पहले किया जाता रहा हैं। जिनके कंधों पर मतदाताओं को बूथ तक पहुंचाने की जिम्मेदारी थी, वह खुद भी नहीं निकले तो वोटर्स को क्या लें जाते उम्मीदवारों ने यह भी कहा कि हमें पार्टी के कुछ क्षेत्रीय नेताओं से कोई सहयोग नहीं मिला बल्कि उन नेताओं ने छवि खराब की।
उधर, इसी कड़ी में शुक्रवार को कानपुर क्षेत्र के हारे हुए उम्मीदवारों के साथ बैठक हुई जिसमें भी हारे हुए प्रत्याशियों ने पार्टी कार्यकर्ताओं पर भीतरघात करने की बातें कहीं हैं। लगभग अभी तक जो भी हारे हुए प्रत्याशियों ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है उनमें हार के कारण जो बताएं है वह लगभग एक जैसे ही है कुछ प्रत्याशियों ने नाम सहित लोगों को चिन्हित किया है कि इन पार्टी नेता व कार्यकर्ता के कारण हार हुई तो कुछ इशारों में बता रहे हैं।
वैसे देखने वाली बात यह है कि अमेठी और रायबरेली के प्रत्याशी अपनी हार की रिपोर्ट में क्या लिखते हैं।