अमर शहीद कवि भोलानाथ शेखर की जयंती समारोह का हुआ आयोजन
लखीमपुर-खीरी । स्वर्गीय कवि भोलानाथ शेखर जी की 112वीं जयंती और उनकी स्मृति में आयोजित कार्यक्रम के बारे में अत्यंत भावपूर्ण और प्रेरक है। लखीमपुर खीरी में आयोजित इस समारोह में परिवार के सभी सदस्यों ने उनकी कविताओं का पाठ कर श्रद्धांजलि दी, जिससे उनकी साहित्यिक धरोहर और देशप्रेम की भावना को सम्मान मिला।
शेखर जी का साहित्य वीर रस और ओज से परिपूर्ण था, जिसका प्रमाण उनकी रचनाओं जैसे "तलवार चली" और "भारतीय नारी" में मिलता है। उनकी कविताएं न केवल काव्य प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, बल्कि देशभक्ति और नैतिक मूल्यों को भी प्रकट करती हैं।
यह भी हृदयस्पर्शी है कि 13 अक्टूबर 1965 को, एक ऐतिहासिक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के दौरान, मंच पर कविता पाठ के बाद उन्होंने राष्ट्रकवि डॉक्टर विजेंद्र अवस्थी के कंधे पर सिर झुकाते हुए प्राण त्याग दिए। उनका यह बलिदान उनकी काव्य-प्रेम की गहराई और कला के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाता है।
इस अवसर पर परिवार के छोटे-बड़े सभी सदस्यों की भागीदारी से यह स्पष्ट होता है कि शेखर जी की विरासत को भावी पीढ़ियों द्वारा भी संजोया जा रहा है। नगर पालिका परिषद द्वारा दशहरे के मेले में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन भी उनकी स्मृति को जीवित रखे हुए है।
शेखर जी के प्रति परिवार और समाज का यह सम्मान न केवल उनके साहित्यिक योगदान का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि उनकी लेखनी ने जनमानस पर गहरी छाप छोड़ी है। ऐसे महान कवि को सच्ची श्रद्धांजलि।