अधर्मी रावण वध के साथ श्रीराम ने धर्म की स्थापना कर प्रथ्वी से अधर्म का नाश किया।
लखीमपुर। जनपद के इतिहास का गौरव रहे रामलीला महोत्सव में रावण वध का कार्यक्रम विजयदशमी के पर्व पर संपन्न हुआ। हजारों की संख्या में लोग शहर और गांव से देखने के लिए रामलीला मेला मैदान ग्राउंड में दोपहर से इकट्ठा हो गए।
पुलिस शासन व्यवस्था भी अपनी चौकसी में नजर आया कई थानों का पुलिस फोर्स आज मेला ग्राउंड में तैनात रही, तो वहीं फायर विभाग तथा खुफिया विभाग व गुप्तचर भी अपनी - अपनी भूमिका में नजर आए।
आपको बता दें कि प्रतिवर्ष शरदीय नवरात्रि में लखीमपुर नगर क्षेत्र के रामलीला मैदान में रामलीला महोत्सव का आयोजन किया जाता है। जो की नवरात्रि के प्रथम दिन से प्रारंभ होकर विजयदशमी के दिन तक चलता है और विजयदशमी के दिन रावण वध कर रामलीला का अंतिम दिन समाप्त होता है। तत्पश्चात भारत मिलाप और राजगद्दी के साथ रामलीला महोत्सव का समापन हो जाता है। बात की जाए विजय दशमी के दिन की तो आदमी रावण वध की लीला देखने के लिए नगर वासियों के साथ दूर-दूर गांव से ग्रामीण बस द्वारा या अपने निजी वाहन के द्वारा आ जाते हैं कोई अपने रिश्तेदार के यहां रुक जाता है वहां खड़ा करता है तो कोई साइकिल स्टैंड का सहारा लेता है।
शाम को अंधेरा होते हैं रावण और राम का भीषण महासंग्राम युद्ध आरम्भ हो जाता है सर्वप्रथम मैदान में मेघनाथ और राम भ्राता लक्ष्मण का युद्ध होता है। युद्ध के दौरान जब मेघनाथ लक्ष्मण जी से अपनी हार देख कर वह महाशक्ति का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित करते हैं लक्ष्मण का मूर्छित होना देखकर हनुमान जी क्रोधित होते हैं और मेघनाथ को मुक्का मार कर लक्ष्मण जी का अचेत शरीर को उठाकर प्रभु श्री राम के खेमे में पहुंचते हैं और तत्पश्चात संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी को पुनः जीवन दान देते हैं। इसी समय श्री राम हनुमान को गले लगाकर कहते हैं कि आप हमारे भाई के समान हैं दूसरी तरफ रावण के महल में मेघनाथ के जय जयकार हो रहा हैं। तो इसी समय गुप्तचर बताता है कि प्रभु श्री राम का भाई जीवित हो गया एक बार पुनः दोनों सेनाएं आमने-सामने होती है और फिर उनका महासंग्राम चालू हो जाता है । तो वही रावण अपने भाई कुंभकरण को निंद्रा का समय पूरा होने से पहले ही जगाता है और उनको युद्ध में जाने को तैयार करता है कुंभकरण अपने भाई के बंधु के प्रति कर्तव्य निष्ठा होने के साथ ज्ञानी था और वह प्रभु श्री राम से बैर न करने की सलाह देता है।
परंतु रावण का प्रतिरोध देखते हुआ अपने भाई धर्म को निभाते हुए प्रभु श्री राम के सामने युद्ध करता है और वीरगति को प्राप्त होता है तत्पश्चात एक बार फिर प्रभु श्री राम और रावण आमने-सामने होकर के दोनों सेनन में बहुत देर युद्ध होने के बाद प्रभु श्री राम रावण की नाभि में वार कर रावण को वीरगति प्राप्त करते हैं। तब पश्चात रामलीला ग्राउंड में जय श्री राम, जय श्री राम के नारे लगाते हैं पूरा रामलीला ग्राउंड प्रभु श्री राम के नारों से गूंज उठता है ट्रस्ट द्वारा की गई।
आतिशबाजी की व्यवस्था भी मन मोहक होती है और दशमी के रावण वध पर चार चांद लगाती है चारों तरफ पटाखे की गूंज ही गूंज सुनाई पड़ रही होती तो जय श्री राम की घोष भी उसी के साथ चार चांद लग रही होती है । तत्पश्चात मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक व जिला अधिकारी दुर्गा शक्ति नाग पाल के द्वारा रावण के पुतले में बाण मार कर राम रावण का पुतला दहन के होता है रावण पुतला दहन के साथ ही वहां पर खड़ी पब्लिक रावण की हड्डियों को लेने के लिए उतावली हो जाती है।