स्व. डा.गायत्री नाथ पंत की स्मृति में अखिल भारती कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया।
लखीमपुर - खीरी। रविवार को सिंगाही के रामलीला मेले में लोक सृजन संस्था के तत्वाधान में आयोजित स्व. डा.गायत्री नाथ पंत की स्मृति में अखिल भारती कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया।
जिसमें देश के सुप्रसिद्ध कवि और शायरों ने अपनी रचनाओं से रात भर समां बांधे रखा। कार्यक्रम का शुभारंभ रिटायर्ड क्स्टम एवं एक्साइज प्रिंसिपल कमिश्नर संजय पंत के कर कमलों द्वारा मा सरस्वती के चित्र का माल्यापर्ण कर एवं दीप जलाकर किया गया। इसके बाद कवि सम्मेलन का आगाज प्रतापगढ की धरती से पधारी कवियत्री अर्चना सिंह की वाणी वंदना से हुआ। इसके बाद
राजस्थान के आए देश के नामी गीतगार कुंअर जावेद ने यह पंक्तियां पढकर महफिल लूट ली " मेरे खत पहुंचाती नहीं है खुद रख लेती है। मुझको कुछ - कुछ शक होता है तेरी सहेली पर।। रीवां मध्य प्रदेश से आए हास्य कवि कामता माखन ने इन पंक्तियों से खूब ठहाके लगवाए। तुम भारत को भारत रहने दो इसे न एडवांस करो जी। इस भारत में संस्कार बचाओ न लुंगी डांस करो जी।। पटियाली हाथरस के ओज कवि शरद लंकेश ने पढा। मैं क्षमा याचना करता हूं। मैं व्यंग बाणों से डरता हूं।।आगरा की मशहूर शायरा कमीम कौशर ने अपनी इस गजल से समां बांधा।चैन दिन नहीं न सुकूं रात में। आने का हो गया इक मुलाकात में।। तुम तो ऐसे न थे तुम को क्या हो गया।क्यों जलाए दिये चांदनी रात में।। राय बरेली के उभरते हास्य कवि उत्कर्ष उत्तम ने इन पंक्तियों से महफिल को गुदगुदाया। रात -रात भर मुझसे बात करती थी। और कलुआ के संग फरार हो गई।। इसके साथ ही आगरा के मशहूर शायर अनवर अमान आकबराबादी, लखनऊ से आए हलधर गोंडवी ,फारूख सरल , बाराबंकी के गीतकार संजय सांवरा, प्रशांत पाण्डेय , सीतापुर के हास्य कवि लवकुश शुक्ला ने भी काव्यपाठ किया। कवि सम्मेलन का संचालन रायबरेली के प्रसिद्ध संचालक नीरज पाण्डेय द्वारा किया गया।
इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में एस डी एम निघासन राजीव निगम, रिटार्यड कस्म एस पी राजेंद्र भंडारी, पूर्व बीआरसी बलविंदर सिंह, थानाध्यक्ष अजीत कुमार, पूर्व ईओ उमाशंकर तिवारी, चेयरमैन प्रतिनिधि मो.हारून, मो. आसिफ , अनूप भंडारी, अतुल भंडारी, रामनरेश सोनी , सतीश श्रीवास्तव, सभासद , रामनरेश गुप्ता, नरेंद्र गुप्ता, प्रभात शुक्ला, आफाक हुसैन (बच्चा ) ,राहुल गुप्ता, भाजपा नेता रामचंद्र जायसवाल , राजेंद्र जायसवाल , तुषार पाण्डेय , सहित हजारों श्रोताओं ने कड़ाके की ठंड में काव्य रचनाओं का रसपान किया।